अपनी तन्हाईयो से लड़ते लड़ते,
ना जाने कहाँ निकल आया हूँ मै |
प्यार का घरौंदा बनाया था कभी मैंने,
उसे ना जाने कहाँ छोड़ आया हूँ मैं |
सफ़र में ना जाने कितने हमसफ़र मिले,
किसी को भूल किसी को याद करता आया हूँ मै |
ये जीवन पथ है इसपे अकेला ही चलना होगा,
इसी सबक के साथ दूर चला आया हूँ मै |
अजय ' विद्रोही'
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