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शनिवार, 27 अक्टूबर 2012

मीठी यादे

जिन्दगी में क्या है खट्टे मीठे यादों के सिवा कुछ गुजरे हुए पल , कुछ खुशनुमा लम्हा कुछ अपनों का साथ , कुछ बिछड़े हुए यार यही है जिंदगी जो पल दो पल की मोहताज है अपनों के लिए , जो बिखरी हुयी यादो को समेटते हुए , याद करते हुए चलती चली जा रही है अजय 'विद्रोही'

जीवन पथ

अपनी तन्हाईयो से लड़ते लड़ते, ना जाने कहाँ निकल आया हूँ मै | प्यार का घरौंदा बनाया था कभी मैंने, उसे ना जाने कहाँ छोड़ आया हूँ मैं | सफ़र में ना जाने कितने हमसफ़र मिले, किसी को भूल किसी को याद करता आया हूँ मै | ये जीवन पथ है इसपे अकेला ही चलना होगा, इसी सबक के साथ दूर चला आया हूँ मै | अजय ' विद्रोही'

जिन्दगी को बहुत करीब से देखा है ,

जिन्दगी को बहुत करीब से देखा है , बुनते हुए ख्वाबो में रात गुज़रते देखा है , सपनों की दुनिया में दूर तक जाकर, फिर अपने आप को लौटते हुए देखा है ; बहुत दूर चलता गया जीवन की राहो में , अंगारों पे जलते हुए पावो को देखा है ; जिन्हें अपना बनाया जिन्दगी की राह में , हमने उन्हें लूटते हुए देखा है ; कब वो मिले कब बिछड़ गए इस राह में , मैंने उस बेवफा की वफाई को देखा है ;