जिन्दगी में क्या है खट्टे मीठे यादों के सिवा
कुछ गुजरे हुए पल , कुछ खुशनुमा लम्हा
कुछ अपनों का साथ , कुछ बिछड़े हुए यार
यही है जिंदगी जो पल दो पल की मोहताज है
अपनों के लिए , जो बिखरी हुयी यादो को
समेटते हुए , याद करते हुए चलती चली जा रही है
अजय 'विद्रोही'
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