जिन्दगी को बहुत करीब से देखा है ,
बुनते हुए ख्वाबो में रात गुज़रते देखा है ,
सपनों की दुनिया में दूर तक जाकर,
फिर अपने आप को लौटते हुए देखा है ;
बहुत दूर चलता गया जीवन की राहो में ,
अंगारों पे जलते हुए पावो को देखा है ;
जिन्हें अपना बनाया जिन्दगी की राह में ,
हमने उन्हें लूटते हुए देखा है ;
कब वो मिले कब बिछड़ गए इस राह में ,
मैंने उस बेवफा की वफाई को देखा है ;
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें