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शनिवार, 27 अक्टूबर 2012

जिन्दगी को बहुत करीब से देखा है ,

जिन्दगी को बहुत करीब से देखा है , बुनते हुए ख्वाबो में रात गुज़रते देखा है , सपनों की दुनिया में दूर तक जाकर, फिर अपने आप को लौटते हुए देखा है ; बहुत दूर चलता गया जीवन की राहो में , अंगारों पे जलते हुए पावो को देखा है ; जिन्हें अपना बनाया जिन्दगी की राह में , हमने उन्हें लूटते हुए देखा है ; कब वो मिले कब बिछड़ गए इस राह में , मैंने उस बेवफा की वफाई को देखा है ;

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