बहुत दिनों से इस देश में अँधेरा व्याप्त था | सभी तरफ आराजकता का माहौल है , जनमानस को हमेशा राजनितिक दलों द्वारा छला गया लेकिन जब एक रोशनी जगमगाई , जब एक सवेरा हुआ तब तमाम राजनितिक दलों के होश उड़ गए है | अब वो कमियां निकालने में जुट गए है , कारण यह की वो इस आन्दोलन की सफलता से डर गए है | उन्हें लगता है कैसे इतने लोग अपने आप से इकठ्ठा हो गए बिना कुछ खर्च किये ही | उन्हें आश्चर्य हो रहा है क्योंकि वो अपनी सभाओं में लोगो लाने के लिए पैसे खर्च करते है प्रलोभन देते है बस , वाहन आदि की व्यवस्था करते है | लेकिन यहाँ तो ऐसा कुछ नहीं हुआ | सब लोग अपने वाहन से आये वो भी परिवार के साथ , बच्चे , जवान सभी शामिल हुए स्वेक्षा से |इनके तरीके से आन्दोलन के सफलता का मतलब ये है है की दूकाने लुटे , वाहन जले , कार्यालय न चले , व्यापार ठप हो जाए , बीमार मर जाए आदि आदि लेकिन इस आन्दोलन में ऐसा कुछ नहीं हुआ , दुकाने भी चली वाहन भी चला और कार्यालयों में काम भी हुआ और कर्मी आन्दोलन में शामिल भी हुए | दूसरी समस्या कैसे हम जुगाड़ करके हम अपनी पार्टी के सभाओं के लिए फिल्म स्टार और प्रसिद्द हस्तियों को बुलाते है ताकि लोग आये उन्हें हम कितने प्यार से सम्मान के साथ खिलाते पिलाते है फिर मंच तक लाते है फिर भी लोग उस अनुपात में नहीं आते है | यहाँ फ़िल्मी हस्तियाँ भी आयी प्रसिध्ध लोग भी आये बिना किसी खर्च के और खुशामद के जो नहीं शामिल हुए वो जनता से अपील किये की अपना समर्थन दे इस आन्दोलन को जो लोग भी आये उन्हें किसी प्रकार से विशेष दर्ज़ा नहीं दिया गया और वो भी एक आम नागरिक की तरह इस आन्दोलन में शामिल हुए |यहाँ तो हमें मत पाने के लिए या इकठ्ठा करने के लिए लोगो को जाति और धर्म के नाम पर बांटना पड़ता है , लेकिन इस आन्दोलन में किसी ने न किसी के जाति पूछी और ना ही धरम, सभी समुदाय के लोग शामिल हुए बिना बहलाए ,फुसलाये और बरगलाए |
अब भी उनको शक है की मांगे मान ली गयी है लेकिन पूरी नहीं होंगी कारण यह है की भाई आप आन्दोलन चलाये अछि तरह से वो ठीक है लेकिन उसका फैसला तो हम ही करेंगे न अंत में हमारे पास ही आओगे क्योंकि उन्हें पता है की हम राजनितिक दल कितने घाघ है कितनी घोसडाये हमने अपने चुनावी मंच से की है , चुनाव में हमने कितनी मांगो को माना है , लेकिन क्या कुछ हुआ है | येहाँ तो ये है की जनता ने श्री अन्ना जी के नेतृत्वा में मांगे जबरदस्ती मंगवा ली और साथ साथ में धमकी भी दिया की लड़ाई अभी बाकी है और जब तक आप हमारी मांगो को पूरा नहीं करते हम आपको चैन से बैठने नहीं देंगे और साथ में ये भी बोला की तुम लोगो पर विश्वाश नहीं है हम भी उसमे शामिल होकर काम काज क्या हो रहा है देखेंगे |उनके सारे सूत्र ध्वस्त हो गए देखते देखते | उनका मान मर्दन हो गया सो सोचते थे की " हम तो भये कोतवाल अब डर काहे का "|
राजनितिक दल अवसरवादिता के शिकार है . भ्रस्ट है लेकिन उलहाना ये देते है की हमें जनता ने चुना है , अगर हम भ्रस्ट है तो इसकी जिम्मेदार जनता है क्योंकि वो भी भ्रस्ट है | वो भी अपने छोटे मोटे कामो के लिए रिश्वत देती है | इस नाते इनको भी घोटाला करने का अधिकार है |
यह आन्दोलन राजनितिक दलों के लिए एक सबक है | कैसे एक साधारण आदमी की आवाज़ पर पूरा देश एकत्रित हो गया | क्या किसी राजनितिक दल के पास ऐसा कोई व्यक्ति है जिसके एक आवाज पर पूरा देश स्वेक्षा से आ जाये ? जब हम आप या स्वयं ये राजनितिक दल खंगालेंगे तो उत्तर नहीं में ही मिलेगा | कारण राजनितिक दलों में सभी अपने निजी स्वार्थ में मशगूल है उनको जनता की समस्या से क्या लेना देना | उन्हें सिर्फ और सिर्फ सत्ता चाहिए ताकि उसका उपभोग अपने लिए और अपने पीढियों के लिए करे | येही कारण है सभी पार्टियों में लोकतंत्र ख़तम हो रहा है और परिवारवाद पनप रहा है |
जनता सब देख रही थी उसे एक नेतृत्वा की तलाश थी और जब मिला तो उसकी टंकार से सारे राजनितिक दल काँप उठे | उन्हें अन्दर ही अन्दर जनशक्ति का एहसास हो गया है और वो कुंठित हो चुके है |
येही कारण है अब वो इस आन्दोलन में कमियां निकालने में जुट गए है सार्वजानिक मंच पे व्यंग वाण चला रहे है |
ये लड़ाई अभी ख़तम नहीं हुयी ये महज़ शुरुआत है अब इस देश में एक ही अन्ना नहीं है हज़ारो अन्ना पैदा हो चुके है जो इस क्रांति के मशाल को तब तक नहीं बुझाने देंगे जबतक की उन्हें उनका लक्ष्य नहीं मिल जाता |
अतः हे राजनीतिज्ञों अब भी वक्त है संभल जाओ जनता के शासक बनाने की जगह उनके सेवक बनने की कोशिश करो |
आम जनता ,
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